Oct 23, 2025, 15:38
उत्तर-प्रदेश के चitrakoot जिले में एक डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म द्वारा जारी किए गए वीडियो में यह दावा किया गया कि कुछ पुलिस अधिकारी ओवरलोडेड ट्रकों को बिना रोक-टोक पास कराने के बदले रिश्वत ले रहे थे।
इस वीडियो के वायरल होते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सात पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है — जिनमें तीन स्टेशन अधिकारी (SOs) शामिल हैं।
मुख्य बातें:
वीडियो में आरोप है कि ट्रकों को नियमों के विरुद्ध पास कराने के लिए रिश्वत ली जा रही थी — यह भ्रष्टाचार और शासन-व्यवस्था के प्रति सार्वजनिक आक्रोश को बड़ी तरह से जगाता है।
वायरल वीडियो ने प्रशासन पर दबाव बनाया कि तुरंत कार्रवाई करें — और उन्होंने भी ऐसा किया। यह दिखाता है कि सामाजिक-मीडिया एवं डिजिटल मीडिया की शक्ति अब पालिसी-निर्माण और जवाबदेही में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
प्रभावित अधिकारी: SO Manoj Chaudhary (Bharatkoop), SO Anupama Tiwari (Pahari), SO Pankaj Tiwari (Rajapur) आदि। जांच अभी जारी है।
समाजिक प्रभाव:
आम नागरिक के लिए यह एक संदेश है कि भ्रष्टाचार के मामलों में जागरूकता बढ़ रही है, और वीडियो/स्टिंग के ज़रिए कार्रवाई हो सकती है।
प्रशासन और पुलिस बल पर लोगों का विश्वास गिरने का खतरा बन सकता है, यदि ऐसी घटनाएं नियमित रूप से सामने आती रहें।
यह विषय विशेष रूप से उन इलाकों में महत्व रखता है जहाँ ओवरलोडिंग, ट्रक-पास, सडक़ सुरक्षा आदि बड़े सामाजिक एवं सुरक्षा-मुद्दे हैं।
मीडिया-वायरलिटी ने एक तरह से निगरानी का नया माध्यम प्रदान किया है — प्रशासन को ‘देखे जाने’ की स्थिति में होना पड़ा है।