Jan 09, 2026, 11:32
मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब यह सामने आया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सत्ता हासिल करने के लिए कुछ नगर निकायों में अपने घोषित राजनीतिक विरोधियों — AIMIM और कांग्रेस — का सहारा लिया है। इन घटनाओं ने न सिर्फ राज्य नेतृत्व को असहज किया है, बल्कि बीजेपी के केंद्रीय हाईकमान की चिंता भी बढ़ा दी है।
बीजेपी हाईकमान को यह डर सता रहा है कि महायुति (BJP-शिवसेना-NCP गठबंधन) के भीतर बढ़ते मतभेदों का असर आने वाले समय में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) समेत अन्य बड़े नगर निगमों के चुनावों में देखने को मिल सकता है। सूत्रों का कहना है कि हाल के दिनों में सबसे ज्यादा खींचतान बीजेपी और उसकी सहयोगी शिवसेना के बीच देखने को मिली है, जिससे गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं।
AIMIM और कांग्रेस से समर्थन ने बढ़ाई मुश्किलें
सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र की दो नगर परिषदों से जुड़े मामले सीधे बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचे हैं।
एक मामले में बीजेपी ने असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली AIMIM के साथ मिलकर नगर परिषद में सत्ता बनाई।
वहीं, दूसरे मामले में पार्टी ने कांग्रेस के समर्थन से सत्ता संतुलन साधा।
इन घटनाओं के सामने आने के बाद केंद्रीय नेतृत्व हैरान है, क्योंकि बीजेपी सार्वजनिक मंचों पर AIMIM और कांग्रेस दोनों पर लगातार हमलावर रही है।
अमित शाह–ओवैसी संदर्भ ने बढ़ाया सियासी ताप
राजनीतिक गलियारों में अमित शाह और असदुद्दीन ओवैसी के नाम साथ-साथ आने से भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि बीजेपी “ज़रूरत पड़ने पर विचारधारा को ताक पर रखकर” सत्ता के लिए किसी से भी हाथ मिला सकती है। विपक्षी दल इसे बीजेपी की दोहरी राजनीति बता रहे हैं।