Jan 09, 2026, 11:50
कोपेनहेगन/वॉशिंगटन। आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच डेनमार्क ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। डेनमार्क सरकार ने ग्रीनलैंड में तैनात अपने सैनिकों को “पहले कार्रवाई, बाद में पूछताछ” की नीति अपनाने का निर्देश दिया है। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मच गई है और अमेरिका भी इस कदम से चौंक गया है।
🔴 क्यों लिया गया यह फैसला?
डेनमार्क का कहना है कि ग्रीनलैंड के आसपास
विदेशी सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी,
ड्रोन और संदिग्ध विमानों की आवाजाही,
और रणनीतिक ठिकानों की निगरानी
लगातार बढ़ रही है। ऐसे में किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए सैनिकों को तुरंत जवाबी कार्रवाई की छूट दी गई है।
🌍 ग्रीनलैंड क्यों है इतना अहम?
ग्रीनलैंड दुनिया के सबसे रणनीतिक इलाकों में गिना जाता है क्योंकि—
यह आर्कटिक क्षेत्र का प्रवेश द्वार है
यहां से रूस, यूरोप और उत्तरी अमेरिका पर नजर रखी जा सकती है
इलाके में दुर्लभ खनिज और प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं
यही वजह है कि अमेरिका लंबे समय से ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने में रुचि दिखाता रहा है।
🇺🇸 अमेरिका क्यों है सकते में?
अमेरिका के लिए यह फैसला इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि—
ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य बेस पहले से मौजूद हैं
बिना समन्वय के “पहले गोली” की नीति से गलतफहमी या टकराव का खतरा बढ़ सकता है
नाटो सहयोगियों के बीच तनाव की स्थिति बन सकती है
सूत्रों के मुताबिक, वॉशिंगटन ने इस फैसले पर डेनमार्क से स्पष्टीकरण भी मांगा है।
⚠️ बढ़ सकता है अंतरराष्ट्रीय तनाव
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश
आर्कटिक क्षेत्र को नया संघर्ष क्षेत्र बना सकता है
रूस और अमेरिका दोनों की नजरें अब डेनमार्क की अगली चाल पर होंगी
किसी छोटी घटना से भी बड़ा सैन्य टकराव हो सकता है
🗣️ डेनमार्क का पक्ष
डेनमार्क सरकार ने साफ किया है कि यह आदेश
रक्षात्मक उद्देश्य के लिए है
किसी देश को निशाना बनाने के लिए नहीं
और सैनिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है