Google Maps से चुनते थे ठिकाने, चोरी की कमाई से सांवलिया सेठ को ‘चढ़ावा’… राजस्थान–MP–तेलंगाना में गैंग की दहशत!

Jan 16, 2026, 11:48

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नई दिल्ली/राजस्थान–मध्य प्रदेश–तेलंगाना, 16 जनवरी 2026: एक बहु‑राज्यीय अपराध गिरोह (गैंग) ने डिजिटल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके चोरियों के ठिकानों का चयन Google Maps से किया, जिससे नेताओं की चांदी और सोना सहित लाखों रुपये की चोरी का नेटवर्क चलाया गया। आरोपी चोरी की कमाई का कुछ हिस्सा सांवलिया सेठ मंदिर में ‘चढ़ावा’ के रूप में भी चढ़ाते थे, जिससे उनकी नकदी क्षमता और भंडार दोनों बढ़ते रहे।

🔍 गैंग का तरीका:
पुलिस के अनुसार यह गिरोह स्मार्टफोन और Google Maps की मदद से पहले से लक्षित घरों और प्रतिष्ठानों को चिन्हित करता था। उन्होंने संपत्ति का विश्लेषण, आस‑पास की सड़कें और संभावित पैदल मार्गों का अध्ययन किया, ताकि चोरी के दौरान सीसीटीवी से बचा जा सके और पैदल भागने के सबसे सुरक्षित मार्गों का चयन किया जा सके।

💰 चोरी और कमाई का चक्र:
चोरी की नकदी, जेवरात और अन्य मूल्यवान वस्तुएं गिरोह द्वारा इकठ्ठा की जाती थीं। इन अवैध आमदनी का एक हिस्सा धार्मिक पंडालों विशेषकर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ स्थित सांवलिया सेठ मंदिर में चढ़ावे के रूप में दिया जाता था, ताकि स्थानीय विश्वास की आड़ में नकदी को ‘धोया’ जा सके। सांवलिया सेठ मंदिर के चढ़ावे में नियमित रूप से करोड़ों रुपये नकद, सोना‑चांदी और अन्य मूल्यवान वस्तुएं एकत्रित होती हैं, जो मंदिर के सबसे बड़े भंडारों में से एक हैं।

📍 तीन राज्यों में दहशत:
इस गिरोह का प्रभाव राजस्थान, मध्य प्रदेश और तेलंगाना तक फैला हुआ पाया गया है।

राजस्थान: चोरी और अवैध लेन‑देन की कई घटनाओं में गैंग का हाथ रहा।

मध्य प्रदेश: वहां से चोरी की गई संपत्तियों का कुछ हिस्सा गिरोह द्वारा अन्य राज्यों में अवैध रूप से बेचा गया।

तेलंगाना: पुलिस ने चोरी‑चोरी की संपत्तियों को ले जाते या छुपाते गिरोह के सदस्य भी गिरफ्तार किए। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि गिरोह के सदस्यों में से कई ने चोरी से हुई कमाई को ‘वैधानिक’ दिखाने के लिए दान तथा मंदिर के चढ़ावे जैसे तरीकों का सहारा लिया।

👮‍♂️ पुलिस की कार्रवाई:
राज्य पुलिस और साइबर सेल ने संयुक्त अभियान चलाकर गिरोह के कई सदस्यों को हिरासत में लिया और चोरी की संपत्ति जब्त की। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह एटीएम कार्ड, नकली पहचान और सुनियोजित योजनाओं के जरिए अपनी गतिविधियों को अंजाम देता था, तथा टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके अपनी पहचान छुपाने की कोशिश करता था।