Jan 22, 2026, 11:54
गीतकार और पटकथा लेखक मनोज मुंतशिर ने मशहूर संगीतकार ए.आर. रहमान के सांप्रदायिक भेदभाव से जुड़े बयान पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बिना नाम लिए बॉलीवुड और समाज में मौजूद दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाए और कहा कि कला के क्षेत्र में भेदभाव की बात करना जरूरी है, लेकिन सच्चाई को पूरे संदर्भ में देखना भी उतना ही अहम है।
मनोज मुंतशिर ने कहा,
“जहां तीन खान सुपरस्टार हो सकते हैं, वहां अगर कोई कहे कि भेदभाव सिर्फ नाम या धर्म के आधार पर हो रहा है, तो उस पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है।”
उन्होंने इशारों में कहा कि भारतीय सिनेमा ने हमेशा टैलेंट को धर्म से ऊपर रखा है और दर्शकों ने कलाकारों को उनके काम के आधार पर स्वीकार किया है।
दरअसल, ए.आर. रहमान ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि उन्हें अपने करियर में कई बार सांप्रदायिक भेदभाव का सामना करना पड़ा। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई। कुछ लोग रहमान के अनुभव का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ इसे अतिशयोक्ति बता रहे हैं।
मनोज मुंतशिर ने आगे कहा कि
“अगर किसी को व्यक्तिगत तौर पर भेदभाव महसूस हुआ है, तो उस दर्द को नकारा नहीं जा सकता, लेकिन पूरे सिस्टम को एक ही नजर से देखना भी सही नहीं है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत जैसे देश में कला और कलाकार को जनता ने हमेशा दिल से अपनाया है।
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी दो खेमे बन गए हैं। एक तरफ लोग मनोज मुंतशिर की बातों को व्यावहारिक और संतुलित बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ यूजर्स का कहना है कि किसी कलाकार के निजी अनुभव को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
कुल मिलाकर, ए.आर. रहमान के बयान और मनोज मुंतशिर की प्रतिक्रिया ने एक बार फिर बॉलीवुड, धर्म और भेदभाव जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बहस छेड़ दी है, जो आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।