Jan 22, 2026, 12:03
जिस इलाके की पहचान कभी साइबर ठगी के मामलों से होती थी, वहीं अब अपराध के खिलाफ एक मिसाल कायम हुई है। ग्रामीणों ने जागरूकता दिखाते हुए 68 मोबाइल फोन पुलिस को सौंपे, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराध में किए जाने की आशंका थी। इस कदम से न सिर्फ पुलिस बल्कि पूरे इलाके में सराहना का माहौल है।
जानकारी के मुताबिक, पुलिस को लगातार इनपुट मिल रहे थे कि कुछ असामाजिक तत्व गांव के भीतर बैठकर ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल और ओटीपी फ्रॉड जैसे अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। इसी बीच पुलिस की जागरूकता मुहिम और ग्रामीणों की समझदारी रंग लाई। गांव के लोगों ने संदिग्ध गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहे मोबाइल फोन एकत्र कर स्वेच्छा से पुलिस को सौंप दिए।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि 68 मोबाइल फोन ऐसे हैं, जिनमें कई सिम कार्ड और संदिग्ध एप्लिकेशन मिले हैं। शुरुआती जांच में इनका इस्तेमाल साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े होने की संभावना जताई जा रही है। सभी मोबाइल को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, ताकि ठगी से जुड़े पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।
ग्रामीणों ने बताया कि साइबर अपराध की वजह से गांव की छवि खराब हो रही थी और युवाओं का भविष्य भी खतरे में पड़ रहा था। इसी को देखते हुए उन्होंने एकजुट होकर अपराध के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया। ग्रामीणों का यह कदम समाज में सकारात्मक बदलाव का उदाहरण बन रहा है।
पुलिस ने ग्रामीणों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यह पुलिस-जन सहयोग का बेहतरीन उदाहरण है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और निर्दोष लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि अगर समाज जागरूक हो जाए, तो साइबर अपराध जैसे जटिल मामलों पर भी प्रभावी तरीके से लगाम लगाई जा सकती है।