Jan 28, 2026, 16:50
महाराष्ट्र की राजनीति में अगर किसी नेता को सबसे ज्यादा ‘अनप्रेडिक्टेबल’ कहा जाता है, तो वह नाम है अजित पवार। उनके फैसले, चाल और टाइमिंग अक्सर ऐसे रहे हैं कि राजनीतिक विश्लेषक भी चौंक जाएं। इसी छवि से जुड़ा एक पुराना लेकिन दिलचस्प किस्सा एक बार फिर चर्चा में है, जब पत्रकार रित्विक भालेकर सीधे शरद पवार के ‘सीक्रेट रूम’ तक पहुंच गए थे—और इसके पीछे अजित पवार की भूमिका मानी जाती है।
🔍 क्या था ‘सीक्रेट रूम’ का मामला?
बताया जाता है कि शरद पवार के आवास में एक ऐसा कमरा था, जहां
अहम राजनीतिक रणनीतियां बनती थीं
चुनिंदा नेताओं और बेहद करीबी लोगों को ही एंट्री मिलती थी
मीडिया के लिए वह इलाका पूरी तरह नो-एंट्री ज़ोन माना जाता था
लेकिन एक दिन पत्रकार रित्विक भालेकर वहां तक पहुंच गए—और यही बात महाराष्ट्र की सियासत में कानाफूसी का विषय बन गई।
🧠 अजित पवार की ‘अनप्रेडिक्टेबल’ चाल
सूत्रों के मुताबिक, उस वक्त अजित पवार का अंदाज़ बाकी नेताओं से बिल्कुल अलग था।
उन्होंने न तो खुलकर विरोध किया
न ही सीधे तौर पर समर्थन
लेकिन हालात ऐसे बने कि एक पत्रकार अंदर तक पहुंच गया
यही वजह है कि अजित पवार को अक्सर राजनीतिक पहेली कहा जाता है—जो कब, क्या और क्यों करेंगे, यह आखिरी वक्त तक साफ नहीं होता।
🗣️ राजनीतिक गलियारों में चर्चा
इस घटना के बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि
👉 क्या यह जानबूझकर किया गया था?
👉 या फिर अजित पवार की कार्यशैली का एक और उदाहरण था?
राजनीति के जानकार मानते हैं कि अजित पवार कई बार ऐसे संकेत देते हैं, जिनका मतलब वक्त बीतने के बाद समझ आता है।
📌 आज भी कायम है वही छवि
चाहे सत्ता परिवर्तन हो, अचानक शपथ ग्रहण या फिर पार्टी के अंदर बड़े फैसले—अजित पवार आज भी उतने ही अनप्रेडिक्टेबल माने जाते हैं।
रित्विक भालेकर और ‘सीक्रेट रूम’ का किस्सा उसी छवि को और मजबूत करता है।