Jul 10, 2026, 15:11
फीफा टूर्नामेंट में खिलाड़ियों पर हुई अलग-अलग अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर एक खिलाड़ी को गंभीर फाउल के मामले में दो मैचों के लिए निलंबित कर दिया गया, जबकि दूसरी ओर रेड कार्ड मिलने के बावजूद दूसरे खिलाड़ी को अगले मुकाबले में खेलने की अनुमति मिलने से फुटबॉल जगत में बहस तेज हो गई है।
दरअसल, दोनों मामलों की परिस्थितियां अलग-अलग थीं। पहले खिलाड़ी पर अनुशासनहीन व्यवहार और खतरनाक चुनौती के कारण फीफा की डिसिप्लिनरी कमेटी ने अतिरिक्त जांच के बाद दो मैचों का प्रतिबंध लगाया। वहीं दूसरे खिलाड़ी को मैदान पर रेड कार्ड जरूर मिला, लेकिन बाद में वीडियो फुटेज और रेफरी की रिपोर्ट की समीक्षा के बाद अनुशासन समिति ने पाया कि निर्णय में त्रुटि की संभावना थी। इसके बाद रेड कार्ड से जुड़ी सजा को रद्द या निलंबित कर दिया गया, जिससे खिलाड़ी अगले मैच में उतरने के लिए पात्र हो गया।
फीफा के नियमों के अनुसार, हर रेड कार्ड का मतलब स्वतः लंबा प्रतिबंध नहीं होता। यदि किसी मामले की समीक्षा में यह साबित हो जाए कि रेफरी का फैसला गलत था या घटना की परिस्थितियां अलग थीं, तो अनुशासन समिति सजा में बदलाव कर सकती है। वहीं गंभीर हिंसक व्यवहार, प्रतिद्वंद्वी को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने या असभ्य आचरण जैसे मामलों में अतिरिक्त मैचों का प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
हालांकि सोशल मीडिया पर कई प्रशंसकों ने इस फैसले को दोहरे मापदंड बताते हुए सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि समान घटनाओं में अलग-अलग फैसले खेल की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं। दूसरी ओर विशेषज्ञों का मानना है कि हर मामले का फैसला उपलब्ध सबूत, रेफरी की रिपोर्ट और फीफा के अनुशासनात्मक नियमों के आधार पर अलग-अलग किया जाता है, इसलिए दोनों मामलों की सीधी तुलना करना उचित नहीं होगा।
अब सभी की नजर फीफा की आधिकारिक अनुशासन समिति की विस्तृत रिपोर्ट पर है, जिससे यह साफ हो सकेगा कि दोनों खिलाड़ियों के मामलों में अलग-अलग फैसला किन कानूनी और तकनीकी आधारों पर लिया गया।