Jul 15, 2026, 15:58
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के प्रबंधन को लेकर संत समाज ने एक नई मांग उठाई है। विभिन्न अखाड़ों और धार्मिक संगठनों से जुड़े संतों का कहना है कि राम मंदिर केवल एक प्रशासनिक संस्था नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इसलिए मंदिर के शीर्ष पद पर किसी कॉरपोरेट शैली के CEO की नियुक्ति के बजाय “प्रधान राम सेवक” की व्यवस्था की जानी चाहिए।
संतों का तर्क है कि “प्रधान राम सेवक” शब्द सेवा, समर्पण और आध्यात्मिक जिम्मेदारी का प्रतीक है, जबकि CEO शब्द व्यवसायिक और प्रबंधकीय सोच को दर्शाता है। उनका कहना है कि मंदिर का संचालन श्रद्धा और सेवा भाव से होना चाहिए, न कि केवल प्रशासनिक ढांचे के आधार पर।
कुछ संतों ने यह भी कहा कि अयोध्या की परंपरा में भगवान राम को राजा और स्वयं को उनका सेवक माना जाता है। ऐसे में मंदिर प्रशासन का प्रमुख भी स्वयं को “राम का सेवक” माने, यही भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के अनुरूप होगा।
हालांकि, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से इस मांग पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ट्रस्ट पहले से ही मंदिर के संचालन, सुरक्षा, दर्शन व्यवस्था और विकास कार्यों के लिए प्रशासनिक ढांचा तैयार कर चुका है।
इस मुद्दे ने धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। एक पक्ष इसे परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों की रक्षा से जोड़ रहा है, जबकि दूसरा पक्ष मानता है कि इतने बड़े धार्मिक परिसर के सुचारु संचालन के लिए आधुनिक प्रबंधन व्यवस्था भी आवश्यक है। अब देखना होगा कि ट्रस्ट संत समाज की इस मांग पर क्या रुख अपनाता है।