RSS को शाखा लगाने के लिए लेनी होगी इजाजत? कर्नाटक के नए बिल से गरमाई सियासत

Aug 14, 2026, 11:39

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कर्नाटक में सार्वजनिक जगहों पर संगठनों की गतिविधियों को लेकर सरकार के नए प्रस्ताव ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। राज्य कैबिनेट ने ‘कर्नाटक राज्य सार्वजनिक स्थान और प्रवेश विनियमन विधेयक, 2026’ को मंजूरी दी है। इसके तहत सरकारी परिसरों और सार्वजनिक संपत्तियों पर निजी कार्यक्रम, बैठक, रैली या अन्य गतिविधियां आयोजित करने के लिए पहले सरकारी अनुमति लेना जरूरी हो सकता है।

क्या RSS पर पड़ेगा सीधा असर?

प्रस्तावित कानून में किसी एक संगठन का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन इसका राजनीतिक संदर्भ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गया है। रिपोर्टों के मुताबिक सरकार का फोकस ऐसे संगठनों की गतिविधियों को नियंत्रित करने पर है, जो सरकारी स्कूलों, मैदानों या अन्य सार्वजनिक संपत्तियों का इस्तेमाल करते हैं।
कर्नाटक में सार्वजनिक जगहों पर संगठनों की गतिविधियों को लेकर सरकार के नए प्रस्ताव ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। राज्य कैबिनेट ने ‘कर्नाटक राज्य सार्वजनिक स्थान और प्रवेश विनियमन विधेयक, 2026’ को मंजूरी दी है। इसके तहत सरकारी परिसरों और सार्वजनिक संपत्तियों पर निजी कार्यक्रम, बैठक, रैली या अन्य गतिविधियां आयोजित करने के लिए पहले सरकारी अनुमति लेना जरूरी हो सकता है।

क्या RSS पर पड़ेगा सीधा असर?

प्रस्तावित कानून में किसी एक संगठन का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन इसका राजनीतिक संदर्भ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गया है। रिपोर्टों के मुताबिक सरकार का फोकस ऐसे संगठनों की गतिविधियों को नियंत्रित करने पर है, जो सरकारी स्कूलों, मैदानों या अन्य सार्वजनिक संपत्तियों का इस्तेमाल करते हैं।
पहले भी हो चुका है टकराव

कर्नाटक में RSS की सार्वजनिक गतिविधियों को लेकर कांग्रेस सरकार और संघ के बीच पहले से ही विवाद चल रहा है। चित्तापुर में रूट मार्च की अनुमति को लेकर RSS ने कर्नाटक हाई कोर्ट का रुख भी किया था। नए बिल के बाद यह टकराव और बढ़ने के आसार हैं।

यानी फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि बिल RSS पर अलग से प्रतिबंध लगाने की बात नहीं करता, बल्कि सार्वजनिक और सरकारी जगहों पर गतिविधियों के लिए अनुमति की व्यवस्था प्रस्तावित करता है।