Aug 24, 2026, 16:55
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह सत्ता में आने के महज करीब पांच महीने बाद ही आलोचनाओं के घेरे में हैं। 27 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री बनने वाले शाह ने युवाओं और Gen-Z की उम्मीदों के साथ सत्ता संभाली थी, लेकिन अब उनके कामकाज, संसद में मौजूदगी और सरकार के फैसलों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
📋 150 दिनों में क्या रहा खास?
1. भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े दावे, लेकिन विवाद भी
शाह सरकार ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस और कई संस्थागत सुधारों का एजेंडा पेश किया। सरकार ने अपने 100 दिनों के रिपोर्ट कार्ड में 100-पॉइंट एजेंडा पर 87.2% प्रगति का दावा किया। हालांकि विपक्ष ने सरकार के प्रदर्शन को कमजोर और अपरिपक्व बताया।
2. सरकार के मंत्रियों पर ही सवाल
सरकार के शुरुआती दौर में दो मंत्रियों को भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच पद छोड़ना पड़ा। इससे शाह के उस वादे पर सवाल उठे जिसमें उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था।
3. संसद से दूरी बनी बड़ी परेशानी
प्रधानमंत्री शाह की संसद में कम मौजूदगी विपक्ष के निशाने पर है। रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआती 39 संसदीय बैठकों में वह सिर्फ 5 में शामिल हुए। इसी को लेकर स्पीकर ने उन्हें 26 अगस्त को सदन में उपस्थित होकर सांसदों के सवालों का जवाब देने के लिए बुलाया है।
4. Gen-Z के गढ़ में ही नाराजगी
जिस युवा लहर ने बालेन शाह को सत्ता तक पहुंचाया, उसी वर्ग और उनके प्रभाव वाले इलाकों में अब असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। जुलाई में मधेश क्षेत्र में उनके खिलाफ प्रदर्शन हुए, जहां लोगों ने अधूरे वादों और सरकार के फैसलों पर नाराजगी जताई।
क्या बालेन शाह का 'Gen-Z मॉडल' फेल हो रहा है?
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि बालेन शाह की सरकार विफल हो गई है। सरकार ने कई सुधारों और प्रशासनिक बदलावों का दावा किया है, लेकिन उम्मीदों और जमीनी परिणामों के बीच अंतर लगातार चर्चा का विषय बन रहा है।
150 दिनों का सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या बालेन शाह पुरानी राजनीति को बदलने वाले Gen-Z नेता साबित होंगे या खुद उसी राजनीतिक व्यवस्था का हिस्सा बन जाएंगे, जिसके खिलाफ उन्होंने राजनीति शुरू की थी?