नेपाल के ऊपर भोटेकोशी जैसे और 47 'वाटर बम', कभी भी ला सकते हैं बड़ी तबाही

Aug 27, 2026, 12:44

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काठमांडू: नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हिमालयी ग्लेशियर झीलों को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, नेपाल के अलग-अलग नदी बेसिनों में 47 संभावित रूप से खतरनाक ग्लेशियल झीलों की पहचान की गई है। इन झीलों के अचानक फटने पर ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) आ सकती है, जिससे निचले इलाकों में बेहद तेजी से बाढ़ पहुंच सकती है।

क्या है 'वाटर बम'?

हिमालय में ग्लेशियरों के पिघलने से कई जगह बड़ी झीलें बन गई हैं। इनमें से कुछ झीलें बर्फ या मलबे से बनी प्राकृतिक बांध जैसी संरचनाओं के पीछे रुकी होती हैं। अगर यह प्राकृतिक बांध टूट जाए तो झील का पानी अचानक नीचे की ओर बहता है। इसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF कहा जाता है।

भोटेकोशी हादसे ने बढ़ाई चिंता

26 अगस्त 2026 को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। शुरुआती वैज्ञानिक विश्लेषणों में ग्लेशियर के बड़े हिस्से के ढहने से
बर्फ और चट्टानों का मलबा नीचे आने तथा नदी के प्रवाह को अचानक प्रभावित करने की संभावना जताई गई है।

इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि हिमालयी क्षेत्रों में तेजी से बदलती ग्लेशियर स्थितियों और संभावित खतरनाक झीलों की निगरानी कितनी जरूरी है।

47 झीलों पर क्यों है नजर?

ICIMOD और UNDP की एक रिपोर्ट में नेपाल के कोशी, कर्णाली और गंडकी नदी बेसिनों में 47 संभावित रूप से खतरनाक ग्लेशियल झीलों को चिन्हित और रैंक किया गया था। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ये सभी झीलें तत्काल फटने वाली हैं। इनका जोखिम अलग-अलग है और लगातार निगरानी जरूरी है।

खतरा सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं

हिमालय से निकलने वाली नदियां नेपाल के बाद भारत में प्रवेश करती हैं। ऐसे में बड़े GLOF या फ्लैश फ्लड का असर सीमा पार के निचले इलाकों तक पहुंच सकता है। भोटेकोशी की हालिया बाढ़ ने दिखाया है कि पहाड़ों में अचानक होने वाली ऐसी घटनाओं के लिए नीचे बसे क्षेत्रों में भी समय रहते चेतावनी व्यवस्था बेहद अहम है।

यानी '47 वाटर बम' का मतलब 47 झीलों का तुरंत फटना नहीं है, बल्कि ऐसे संभावित खतरनाक जलाशयों की मौजूदगी है, जिनकी निगरानी और जोखिम कम करने की जरूरत लगातार बनी हुई है।