Sep 01, 2026, 11:47
ज़ी एंटरटेनमेंट के संस्थापक और एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन एमेरिटस सुभाष चंद्रा को मंगलवार को बड़ा झटका लगा। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की पांच सदस्यीय स्पेशल बेंच ने उनके पक्ष में दिए गए ₹6.5 करोड़ के रिपेमेंट प्लान की मंजूरी पर रोक लगा दी।
क्या है पूरा मामला?
सुभाष चंद्रा पर एस्सेल ग्रुप की कंपनियों के लिए दी गई व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े करीब ₹22,006 करोड़ के दावे हैं। 25 अगस्त को NCLT ने करीब ₹22,006.57 करोड़ के स्वीकृत दावों के मुकाबले केवल ₹6.5 करोड़ के भुगतान वाले प्लान को मंजूरी दी थी। इसका मतलब था कि कर्जदाताओं को लगभग 99.97% का हेयरकट स्वीकार करना पड़ता।
अब क्यों लगी रोक?
इस फैसले को लेकर कुछ कर्जदाताओं ने आपत्ति जताई और मामले में अपील की। पहले NCLT की तीन सदस्यीय बेंच में इस बात पर बहुमत की राय नहीं बन पाई कि रिपेमेंट प्लान को कैसे लागू किया जाए। इसके बाद NCLT अध्यक्ष जस्टिस अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल ने मामले की सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय स्पेशल बेंच गठित की।
स्पेशल बेंच ने साफ किया कि पहले दिए गए तीसरे सदस्य के विचार को फिलहाल लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि वह ट्रिब्यूनल की बहुमत राय नहीं थी।
क्या प्रॉपर्टी बेचने पर भी रोक है?
आपके दिए हेडलाइन में प्रॉपर्टी बेचने की बात है, लेकिन उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में मुख्य रूप से ₹6.5 करोड़ वाले रिपेमेंट प्लान पर रोक और व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया की सुनवाई का उल्लेख है। इसलिए प्रॉपर्टी बिक्री पर अलग से लगी रोक का दावा करने से पहले संबंधित NCLT आदेश के उस हिस्से की पुष्टि करना जरूरी है।
मामला अभी निर्णायक रूप से खत्म नहीं हुआ है। पांच सदस्यीय बेंच अब सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया और कर्जदाताओं के दावों पर आगे सुनवाई करेगी।